दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में बुधवार शाम 6.04 बजे 7.2 और 6.05 बजे 7.5 तीव्रता के दो झटके आए। इससे न सिर्फ जान-माल को नुकसान पहुंचा है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका दिया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, एक ओर जहां भूकंप के तुरंत बाद एहतियातन इस रिफाइनरी और इसके आसपास के तेल वितरण केंद्रों में कामकाज को रोक दिया गया है, ताकि बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का आंकलन किया जा सके। वहीं, दूसरी ओर देशभर में एयरपोर्ट, इंटरनेट कनेक्टिविटी, मेट्रो सर्विसेस, कई जगह पानी की सप्लाई और स्कूल को बंद कर दी गई हैं। रिफाइनरी के एक टैंक में लीकेज हुआ दोनों भूकंपों का केंद्र राजधानी कराकस से करीब 290km दूर पश्चिम में मोरोन शहर के पास था, जो वेनेजुएला के प्रमुख तेल और औद्योगिक केंद्रों में से एक है। यहां रिफाइनरी में एक टैंक से लीकेज के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। ये वीडियो पुएर्टो कैबेलो राज्य स्थित एल पालिटो रिफायनरी के एक टैंक का है, जिसमें टैंक लीकेज हो रहा है। वहीं, वेनेजुएला के अंजोआतेगी राज्य में पुएर्टो ला क्रूज रिफायनरी में 7.1 मैग्नीट्यूड के भूकंप के दौरान एक टैंक से छलक गया। भूकंप से आर्थिक और व्यावसायिक प्रभाव इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान: देश का मुख्य सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और प्रमुख बंदरगाह बंद हैं। बिजली और इंटरनेट ग्रिड ठप होने से बैंकिंग सेवाएं और डिजिटल ट्रांजेक्शन पूरी तरह रुक गए हैं। सप्लाई चेन प्रभावित: सड़कों और पुलों के टूटने से देश के भीतर लॉजिस्टिक्स और जरूरी सामानों की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट चुकी है। बीमा और पुनर्निर्माण लागत: शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इस तबाही से अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे वेनेजुएला के लिए पुनर्निर्माण एक बड़ी चुनौती होगा। क्रूड ऑयल मार्केट पर असर: भूकंप के केंद्र के पास स्थित प्रमुख तेल रिफाइनरियों और पाइपलाइनों को एहतियातन बंद कर दिया गया है। भूकंप का केंद्र सीधे इस ऑयल इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के पास होने के कारण दुनियाभर के कच्चे तेल बाजार में सप्लाई प्रभावित होने की चिंताएं बढ़ गई हैं। जानकारों के अनुसार, यदि तेल उत्पादन और निर्यात लंबे समय तक ठप रहा, तो ग्लेबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारतीय बाजार और कच्चे तेल पर असर वेनेजुएला संकट के कारण अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल और लॉजिस्टिक्स की लागत पर दबाव दिखेगा। इसके अलावा, वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में निवेश करने वाली ONGC जैसी भारतीय कंपनियों के ऑपरेशन्स पर भी असर पड़ सकता है। एनर्जी ट्रैक करने वाली एजेंसी केप्लर के डेटा के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर था। मई में भारत को वेनेजुएला ने अप्रैल के मुकाबले करीब 50% ज्यादा तेल सप्लाई किया था।
